जब दिल से दिल मिलते हैं तब कोई सबब नहीं देखताइश्क़ जब होता है किसी को तो मज़हब नहीं देखतातलबगार क्या जाने इन सियासत की लकीरों कोके प्यासा जब पानी ढूंढता है तो सरहद नहीं देखता
— Vinu
सबब कारण · मज़हब धर्म, जाति · सरहद सीमा
June 2023 @poet.vinu

Struggle, society and the mirror — couplets about living, not just loving. 6 pieces, first posted on @poet.vinu.
— Vinu
सबब कारण · मज़हब धर्म, जाति · सरहद सीमा
— Vinu
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कनीज़ सेविका · मुफ़्लिस ग़रीब
— Vinu
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