Vinu Jaglan — philosophy, psychology, politics, society and education
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Shayari · Shayari on life

ज़िंदगी Zindagi

Struggle, society and the mirror — couplets about living, not just loving. 6 pieces, first posted on @poet.vinu.

जब दिल से दिल मिलते हैं तब कोई सबब नहीं देखताइश्क़ जब होता है किसी को तो मज़हब नहीं देखतातलबगार क्या जाने इन सियासत की लकीरों कोके प्यासा जब पानी ढूंढता है तो सरहद नहीं देखता

— Vinu

सबब कारण · मज़हब धर्म, जाति · सरहद सीमा

June 2023 @poet.vinu
मुश्किलें ही जिंदगी का दूसरा नाम है ।कभी तकलीफे हैं, कभी आराम है ॥हादसे तो दस्तूर हैं, जिंदगी के ।सफर में चलते रहना हमारा काम है ॥

— Vinu

January 2025 @poet.vinu
कल एक शख़्स को रोता देख रहा थाफिर पता चला मैं तो आइना देख रहा था

— Vinu

June 2023 @poet.vinu
मोहब्बत ने खेल ऐसे खेले किनफ़रत सारी की सारी विदा हो गयीके शहज़ादा दिल दे बैठा कनीज़ कोऔर शाहज़ादी मुफ़्लिस पे फिदा हो गयी

— Vinu

कनीज़ सेविका · मुफ़्लिस ग़रीब

June 2023 @poet.vinu
क्या वक़्त पे आये हो ग़ज़ब का, आप कैसे हैं?बाकी हाल चाल तो ठीक है सबका, आप कैसे हैं?अच्छा अच्छा, उसे देखने आये हो यहाँवो तो मर गया कब का, आप कैसे हैं?

— Vinu

November 2024 @poet.vinu
चल माना जिंदगी सुधर गयी, तो क्या करेगामगर जिंदगी अगर गुज़र गयी, तो क्या करेगाउसको घर से लेकर जाने वाले लड़केकोर्ट में अगर मुकर गयी, तो क्या करेगा

— Vinu

February 2025 @poet.vinu