हम दोनों के बीच कोई तीसरा साजिश कर रहा थाखुदा से हमारी जुदाई की गुज़ारिश कर रहा थायुं तो मेरा महबूब हमेशा मेरे ही हक में बोलता हैपर ना जाने आज क्युं उसकी सिफारिश कर रहा थामेरा खुदा मेरे हालातों से हमेशा वाक़िफ़ रहता हैमैं रस्ते पे रो रहा था और वो बारिश कर रहा था
— Vinu
जिम्मेदारियों में डूबी अपनी जवानी ढूँढ रहा थाउसके उन आखरी लफ़्ज़ों में मानी ढूँढ रहा थाअब तो इस कदर पागलपन ने घेर लिया है मुझेके मैं दरिया को छोड़ सहरा में पानी ढूँढ रहा था
— Vinu
मानी मतलब · दरिया नदी · सहरा रेगिस्तान
मोहब्बत में कभी पैसा, कभी लिबास आ गयाफ़िर हमें भी उसके बिना, जीना रास आ गयावहाँ उसके हाथों में मेहंदी लग गयीयहाँ हमारे हाथों में गिलास आ गया
— Vinu
कल सारी रात मैं उससे बात करता रहावो थी भी नहीं फिर भी बात करता रहामेरी आँखों से रात भर बहता रहा पानीइसी ग़म में खुदा भी बरसात करता रहा
— Vinu
वो दौर आज भी कांटो की तरह चुभते हैंजब निखरने के दिनों में मैं बिखरता चला गयादिल ने बोहोत सदाएँ दी थी मगरमैं इश्क़ की राहों पे बढ़ता चला गयाना जाने क्या खास बात थी उसके आखरी खत मेंलिखा कुछ भी नहीं था फ़िर भी मैं पढ़ता चला गयावो बेवफ़ा अपनी वफ़ा की बातों से चढ़ा रही थी मुझेमैं भी दानिस्ता उसकी बातों में चढ़ता चला गया
— Vinu
सदाएँ पुकार · दानिस्ता जानबूझकर
दिल से तेरी यादें धीरे-धीरे मुख़्तसर हो रही हैंमेरे लबों से आज ग़ज़लें बिल्कुल सर-बसर हो रही हैंतूने तो कहा था के सब कुछ ख़त्म हो गया है हमारे बीचफ़िर क्यूं तुम्हारी ग़ज़लें मुझको नज़र हो रही हैंऔर तूने मिलना जुलना भी बिल्कुल छोड़ दिया है अब तोलगता है मेरी जान तुम पर भी बेवफ़ाई असर हो रही हैअगर मुझे छोड़ना चाहती है तो छोड़ दे नाफिर आख़िर इस काम में क्यों इतनी कसर हो रही हैसाँसे भी रुक चुकी हैं और दिल भी थम चुका हैबस कुछ इस तरह ही जिंदगी गुज़र-बसर हो रही है
— Vinu
मुख़्तसर कम होना · लब होंठ · सर-बसर पूरी तरह
जिस रात को मुझे, छोड़ कर गयी थी तु…उस रात का कमरा, सज़ा हुआ है वो आज भी…तुझे हिज्र की रात को, भेजा था जो खत मैंने…छू के देख उसे मेरे आसुओं से भीगा हुआ है वो आज भीसदियों पहले डूबाया था, तूने इश्क़ में जिसको…आके देख एक बार, वहीं डूबा हुआ है वो आज भी…
— Vinu
हिज्र जुदाई
इतना वक़्त बीता, पर उसका हाथ मैंने दोबारा पकड़कर नहीं देखा ।उसके अलावा किसी के बदन को, यूँ जकड़कर नहीं देखा ॥आख़िर में वो तरसती रह गयी, बस इक इस खवाहिश के लिए ।मैं भी चलता रहा, पर उसे दोबारा मुड़कर नहीं देखा… ॥
— Vinu
एक आख़िरी लफ़्ज़, उससे आखिर कहना पड़ाक्यों मोहब्बत में, ये दर्द सहना पड़ाआँसु आखों से, जुदाई का सबब पूछने लगेआखिर कौन थी वो, जिनके लिए हमें बहना पड़ा
— Vinu